photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Saturday, October 16, 2010
यह है हिन्दुस्तान
अयोध्या मामले में अदालत की तीन सदस्यीय बेंच ने अपना फैसला सुना दिया। जैसा कि उम्मीद की जा रही थी वैसे कुछ भी नहीं हुआ। लोगों ने शांतिपूर्वक अदालत के फैसले को स्वीकार किया और सबकुछ जैसा चल रहा था, वैसा ही चलता रहा। अदालत ने यहां एक टिप्पणी की थी कि कोई भी इस पर प्रतिक्रिया मत करे। बस इतना ही काफी साबित हुआ। उन्मादियों के मुंह सिल गए। देश की जनता तो हमेशा से ही भाईचारे के साथ रहती आई है। जिन्हें भीड़ जुटानी होती है, मुद्दे वही तलाशते हैं। उनके मुंह पर टेप चिपकाकर अदालत ने एक बार फिर यह साबित करने का मौका दे दिया कि आम नागरिक दिल से, संस्कृति से, सभ्यता से एक हैं। कहते हैं, जब-जब संकट आता है - एका तब तब दिखता है। संकट के समय में समूचा भारत एक परिवार की तरह गुंथ गया। एक विशाल परिवार में छोटे-मोटे झगड़े-झंझट स्वाभाविक हैं। किन्तु संकट में एक होने की शक्ति ही उसकी ताकत होती है। भारतवासियों ने इसी एकजुटता और तटस्थता का परिचय देकर इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। भारतीयों की इस एकजुटता को अवश्य ही दुनिया हसरत भरी निगाहों से देख रही होगी। क्योंकि दुुनिया हमारी इसी ताकत से डरती है। अवाम की एकता ही राष्ट्र को मजबूत बनाती है। यही उसकी असली ताकत है। हथियार और साजोसामान तो साधन मात्र हैं। लोगों को आपस में लड़ाकर एक तरफ जहां हथियारों के सौदागर मुनाफा कमाते हैं वहीं विघ्नसंतोषी तत्व इसपर अपनी रोटी सेंकते हैं। भारत की इस ताकत का स्वाद एक बार अंग्रेजों ने चखा था। सशस्त्र क्रांतिकारी उनकी नाक में दम अवश्य करते थे किन्तु उसके खिलाफ रणनीति बनाई जा सकती थी। उनकी धरपकड़ की जा सकती थी। उन्हें फांसी पर लटकाया जा सकता था। किन्तु जब पूरा देश महात्मा गांधी की पुकार पर एकजुट हो गया तो अंग्रेजों को संकेत मिल गया कि यहां अब बंदूक का जोर नहीं चलेगा। आप 33 करोड़ लोगों को बंदूकों से नहीं जीत सकते। और आज तो हम 135 करोड़ हैं। हमारे देश की हजारों प्रतिभाएं विदेशों में अपने दम पर अपना लोहा मनवा रहे हैं। हम जब भी हारे हैं फूट से हारे हैं। यदि फूट डालने वालों को हम पहचान लें तो क्या पाकिस्तान, क्या चीन और क्या अमरीका, कोई भी हमारी तरफ नजर उठाकर नहीं देख सकेगा। संभवत: हमारी यही सोई हुई शक्ति दोबारा जाग उठी है। दुनिया भर के चिंतकों का मानना है कि भारत एक बार फिर विश्व गुरु होगा, दुनिया उसके कदमों में होगी। इसकी शुरुआत गुरुवार को हो चुकी है। हमने दुनिया के आगे एक आदर्श रखा है। हमें इसे बनाए रखना होगा।
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