photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Saturday, October 16, 2010
हम जू के जानवर नहीं
वृद्धजन दिवस, बुजुर्ग दिवस, सीनियर सिटिजन डे। नाम चाहे जितना भी शालीन हो, इसमें सम्मान लेशमात्र भी नहीं है। कर्मजीवन से रिटायर होने मात्र से क्या हम इंसान नहीं रहे? इंसान एक सामाजिक प्राणी है। वह परिवार चाहता है, पड़ोसी चाहता है। नाते रिश्तेदारों से ही उसकी दुनिया बसती है। अब जबकि हमारे पांव कब्र में लटके हुए हैं, तब लोग हमसे उम्मीद करते हैं कि हम अपना स्वभाव बदलें। यह सम्भव नहीं है। हम पके बांस हैं। पके बांस की खपच्चियों को मोड़कर आकार नहीं दिया जा सकता। न टोकनियां बनाई जा सकती हैं और न ही चटाई। आप कच्चे बांस हो, आप क्यों नहीं खुद को बदलते? हमारी पटरी नहीं बैठती। हम बदल नहीं सकते। अब हम कमाते नहीं हैं इसलिए घर के मुखिया नहीं हैं। मन नहीं लगा तो निकल कर सड़क पर आ गए। किसी ने व्यवस्था कर दी तो वृद्धाश्रम या सियान सदन चले आए। अब तो ऐसा इंतजाम होने लगा है कि लोग रिटायरमेंट के बाद अकेले रहने की तैयारी एडवांस में कर रहे हैं। कोई सियान सदन में बुकिंग करा रहा है तो कोई वृद्धाश्रम में। हमें अच्छा बुढ़ापा नहीं मिला, हमारी बदकिस्मती। पर हम जानवर भी नहीं हैं। हम दया के पात्र भी नहीं है। इसलिए हमारा तमाशा बनाना बंद करो। लोग अपने बच्चों को मैत्रीबाग में जानवर दिखाने ले जाते हैं। कुछ लोग अपने बच्चों को बूढ़ा दिखाने के लिए सियान सदन ला रहे हैं। क्या उम्मीद करते हैं हमसे? हम रोते, बिलबिलाते या तड़पते हुए मिलें। ताकि तुम्हारे बच्चे को यह समझ में आए कि सियान सदन का अकेलापन कितना कष्टकारी है, ताकि तुम्हारा बुढ़ापा बेहतर हो। या फिर हम इतना खुश होकर दिखाएं कि तुम्हारा बच्चा अभी से तुम्हारी कल्पना किसी वृद्धाश्रम में करने लगे? बच्चे को बूढ़ा दिखाने के लिए उसे सियान सदन लेकर आने की जरूरत नहीं है। उसे उसका दादा -दादी या नाना-नानी दिखाओ। उसे बताओ कि ये तुम्हारे अपने मम्मी-पापा हैं जिन्होंने कभी अपने कंधे पर बिठाकर तुम्हें दशहरा दिखाया था। आज ये अशक्त हैं। यह हर किसी के जीवन का नियम है। जो आज बच्चा है, कल जवान होगा और फिर जीवन की संध्या में बूढ़ा होगा। यदि इन सबमे तालमेल बना रहा तो मनुष्य जीवन सार्थक होगा। यदि समर्थ जवानी ने बच्चों को पीटना और बूढ़ों को हकालना बंद नहीं किया तो समझ लो कि इंसानों की बस्ती की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
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