photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Saturday, October 16, 2010
बुढ़ऊ को सीख
ऐ बुढ़ऊ! ले चा पी। सुबह-सुबह बहू गिलास में काली चाय लेकर आई थी। बुढ़ऊ ने चुपचाप चाय ले ली और चुसकने लगा। वह मन ही मन सोच रहा था, बहू कितना ख्याल रखती है। दूध वाली चाय पीने से कफ की शिकायत बढ़ सकती है। पेट में अफारा हो सकता है। गैस बन सकती है। तभी तो बहू फ्रिज में दूध रहते हुए भी उसके लिए अलग से काली चाय बनाकर लाई है। दोपहर के भोजन में भी सूखी रोटी और घीये की सब्जी देखकर वह प्रसन्न हो जाता है। बहू तो बेटी से भी ज्यादा ख्याल रखती है। उसे पता है कि बुढ़ापे में ज्यादा प्रोटीन खाना ठीक नहीं होता। किडनियां कमजोर हो गई हैं। ज्यादा दाल, घी, पनीर खाना मुसीबत को निमंत्रण देता है। गठिया की शिकायत बढ़ जाती है। बूढ़ा खुशी-खुशी सब्जी रोटी खाता है और बाहर पेड़ के नीचे बिछी खटिया पर जाकर बैठ जाता है। यहां पंछियों का कलरव है। सड़क पर आते-जाते लोग दिख जाते हैं। कोई राम-राम काका कहता है। बच्चे भी दादाजी को नमस्ते करना नहीं भूलते। कितना सुकून है यहां। मंद समीर के झोंके में न जाने कब आंख लग जाती है। स्कूल से लौटते ही बच्चे दादाजी को उठा देते हैं। चाय का वक्त हो चला है। बहू बरामदे में इंतजार कर रही है। कुल्ला करके वह चाय पीने पहुंचते हैं। शुगर फ्री बिस्किट के साथ काली चाय चुसकते हैं। फिर दूध का डिब्बा-कूपन लेकर सैर पर निकल जाते हैं। वहां उनकी उम्र के और भी लोग आते हैं। सब मिलकर बातें करते हैं। लोग अपनी-अपनी शिकायतों को पिटारा खोलकर बैठ जाते हैं। बहू-बेटों की लानत मलामत करते हैं और अपना बुढ़ऊ बैठकर मुस्कुराता है। लोग कहते हैं, ‘तुम तो बहुत सुखी हो। तुम्हारी बहू तुम्हारा कितना ख्याल रखती है। घर में शांति है। हमारे यहां तो दिन भर किचकिच होती है। बहू ताने देती है। बेटा भी ऊंची आवाज में बातें करता है। अकसर डांट डपट देता है।’ बुढ़ऊ हंसता है। कहता है, ‘सब मन का फेर है। कल को मैं काली चाय की, सूखी रोटी की, शाम को दूध लाने की ड्यूटी की, शिकायत करने बैठूं तो हमारे यहां भी किच किच होगी। हर चीज का, हर हरकत का उजला पक्ष देखो, खुद भी सुखी रहोगे और बहू भी सुखी रहेगी। बेटा वैसे ही तो नहीं चिल्लाता। जब तुम्हारी किचकिच से बहू का पारा सातवें आसमान पर पहुंचता है और वह बेटे की ऐसी तैसी फेरती है, तभी वह चिड़चिड़ाता है। बहू आत्महत्या की धमकी दे सकती है, फांसी लगाने की कोशिश कर सकती है, घर छोड़ कर जाने की चेतावनी दे सकती है। वह डर जाता है। उसने तुम्हारी उंगली पकड़कर चलना सीखा है। मार भी खाई है और जिद भी की है। तुम उसके अपने हो। अपनी खिसियाहट, झल्लाहट इसलिए वह तुम पर उतारता है। वह इसे अपना अधिकार समझता है। यही तुम्हारी जीत है। वह आज भी तुम्हारा है।’
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