photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Sunday, January 16, 2011
मूर्ख चापलूसों की दोस्ती
कहते हैं दुनिया में दोस्त न हों तो मनुष्य एकाकी हो जाता है और छोटी छोटी मुसीबतें उसकी कमर तोड़ देती हैं किन्तु यदि दोस्त हों पर वे मूर्ख हों तो नित्य प्रतिदिन उसके लिए नई मुसीबतें खड़ी करते हैं। कुछ-कुछ ऐसा ही उनके साथ भी होता है जो चापलूसों की दरबार सजाते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। जब राज्य का गठन हुआ तो चूंकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी इसलिए यहां भी कांग्रेस की ही सरकार बनी। बंटवारे में शायद छत्तीसगढ़ बुरी तरह ठगा जाता यदि एक बेहद काबिल प्रशासनिक अधिकारी यहां का पहला मुख्यमंत्री न बना होता। पर चर्चा उनके गुणों की नहीं बल्कि उनकी प्रशासनिक सख्तियों की होती रही। लिहाजा राज्य के पहले चुनाव में जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर भाजपा की सरकार बना दी। इसमें भी कोई शक नहीं कि डॉ रमन सिंह के रूप में प्रदेश को एक ईमानदार, स्वच्छ, आम जन को समर्पित मुख्यमंत्री मिला। राज्य को न केवल केन्द्र से इफरात धनराशि मिली बल्कि कृषि-वन उपज एवं खनिज संपदाओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में निवेश की गंगा बहने लगी। साक्षरता, रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, निर्माण सभी क्षेत्रों में हमने नए रिकार्ड बनाए। यह पूर्ण सत्य नहीं था पर चापलूसों की फौज ने सरकार की आंखों पर पट्टी बांध दी। जिनका काम सरकार के कामकाज की समीक्षा करना और गरीबों के जीवन की दुश्वारियों की तरफ उनका ध्यान आकर्षित करना था वे चापलूसों की जमात में शामिल हो गए। नि:संदेह प्रदेश में बहुमत से भाजपा की सरकार चुनी गई थी किन्तु यह कहना भी गलत था कि कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया है। हार जीत का अंतर कुछ ही सीटों का था। चंद सीटों का इधर से उधर होना पासा पलट सकता था। पर माहौल ऐसा बनाया गया जैसे कांग्रेस पूरी तरफ साफ हो चुकी है और भाजपा का एकछत्र राज स्थापित हो गया है। जबकि जीत का यह अंतर भी उस अंचल की वजह से था जिसे हम लगातार नक्सल संक्रमित बताते रहे हैं। यहां जनजीवन सामान्य नहीं था। करीब से भिलाई को देखें तो चापलूसी से लुटिया डुबोने का सबसे बढ़िया उदाहरण यहां देखने को मिला। मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने यहां विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। विधानसभा में उन्होंने अपनी काबीलियत और सोच का परिचय दिया पर अपने ही घर में चाटुकारों से घिर गए। नतीजा सामने है। फिर बारी आई नगर की होनहार बेटी सरोज पाण्डेय की। उनके दुर्ग महापौर का कार्यकाल उपलब्धियों से परिपूर्ण था। दुर्ग की शक्ल ही बदल गई थी। उन्हें वैशालीनगर विधानसभा चुनाव लड़ाया गया और फिर लोकसभा का। वे दोनों चुनाव जीत गर्इं। इसके साथ ही चाटुकारों की फौज ने उन्हें घेर लिया तो नगर निगम में मात खानी पड़ गई। इससे पहले चाटुकारों ने महापौर विद्यारतन भसीन की नौका में छेद कर दिये थे। अब यही चाटुकारों की फौज विधायक निरंकारी, महापौर निर्मला यादव और सभापति राजेन्द्र अरोरा को घेरे है। भगवान उन्हें सदबुद्धि दे। सच वह नहीं होता जो अखबारों में छपता है बल्कि वह होता है जो आपके कार्यकर्ता बताते हैं।
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