Monday, January 10, 2011

जनाकांक्षाओं पर भाजपा

कांग्रेस के दीर्घ शासनकाल में जनता को ऐसा लगा था कि अब कुछ नया होना चाहिए। जनता को एक बड़े विकल्प की तलाश थी। यह तलाश 1977 में पूरी हुई थी जनता पार्टी के रूप में। पर यह दुकान ज्यादा दिनों तक चली नहीं। इसके बाद दोबारा जनता ने मौका दिया भारतीय जनता पार्टी को। राजनीतिक विश्लेषकों को भले ही यह लगा हो कि रामजन्मभूमि का मुद्दा इसका कारण था पर यह उसकी असल वजह नहीं थी। जनता एक बार फिर बोर हो गई थी। बोरियत दूर करने के लिए ही उसने चैनल बदला था, बाहर खाने का प्रोग्राम बनाया था किन्तु शौक पूरा होते ही घर का बच्चा घर लौट आया था। कुछ-कुछ ऐसा ही छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन के साथ होने जा रहा है। कहीं न कहीं समझने का फेर है। बेशक सरकार गरीबों की जिन्दगी आसान बनाने की फिक्रमंद है। सरकार ने अनगिनत ऐसी योजनाएं बनाईं और उसके क्रियान्वयन की शुरुआत की जिससे गरीबों के जीवन से कष्टों को दूर किया जा सके, मजदूरों की दुनिया से अनिश्चितता के बादलों को हटाया जा सके। इसका असर भी हुआ किन्तु जितना होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। वजह एक ही थी। मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री राज्य के कोने कोने में जाकर योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर सकता। इस काम के लिए सरकारी मशीनरी है। इसमें कब तेल डालना है, कहां तेल डालना है, कहां हथौड़ी चलानी है और कहां छेनी, इसका ज्ञान होना बहुत जरूरी है। भाजपा अब तक जितने भी बार फेल हुई है, प्रशासनिक नासमझी ही इसका कारण रही है। दूसरे भाजपा स्वयं को बौद्धिक रूप से इतना उन्नत मानती है कि वह किसी की नहीं सुनती। ठस दिमाग जड़ प्रवृत्ति का होता है। इससे डिक्टेटरशिप तो चलाया जा सकता है पर लोकतांत्रिक सत्ता नहीं चलाई जा सकती। डिक्टेटरशिप कभी नहीं चली न हिटलर की और न ही रूस में कम्युनिज्म की। जनाकांक्षाओं के प्रति बेपरवाही हमेशा भारी पड़ती है। बस्तर या देश के किसी भी वनांचल में प्रशासन दशकों तक ताकत का नग्न प्रदर्शन करता रहा है। नतीजा सामने है। आज पूरा प्रदेश बस्तर जैसा हो रहा है। कोई किसी की नहीं सुनता। प्रशासन और पुलिस ढिठाई की सारी सीमाएं लांघ चुके हैं। सरकार उन्हें बचाने में लगी है। किसानों पर लाठियां भांजी जा रही है, युवाओं की रैली को ठेंगा दिखाया जा रहा है। ऐन चुनावों से पहले की गई घोषणाओं एवं कार्यक्रमों ने एक हद तक जनता को भले ही भ्रमित किया हो किन्तु भिलाई नगर निगम चुनाव से ऐन पहले ‘वार फुटेज’ पर किए गए विकास कार्यों को जनता ने ठेंगा दिखा दिया। ढिठाई का सबसे बड़ा उदाहरण बिहार में देखने को मिला। यहां एक स्कूल टीचर रूपम पाठक ने पूर्णिया के बीजेपी एमएलए की हत्या कर दी। बीजेपी ने जांच का भी इंतजार नहीं किया और अपने आदमी को बचाने के लिए रूपम पाठक के चरित्र पर ही लांछन लगा दिया। जबकि अगर किसी व्यक्ति पर यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं तो वह कानून की निश्चित प्रक्रिया द्वारा ही बरी हो सकता है।

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