photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Monday, January 10, 2011
असामान्य सर्दी
जब दिल्ली का तापमान रिकार्ड तोड़कर शिमला से कम हो जाए और रेगिस्तानी इलाके राजस्थान के माउंटआबू का तापमान हिमांक से पांच डिग्री नीचे चला जाए तो निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सर्दी असामान्य है। यूं तो अमेरिका व यूरोप असामान्य बर्फबारी की चपेट में हैं, वहां जनजीवन अस्तव्यस्त है। लेकिन संपन्न देशों की सरकारें व लोग आसन्न बर्फबारी की चुनौती के लिए तैयार रहते हैं। अपने देश में एक तो गरीबी की मार है, दूसरे सरकार व प्रशासन की काहिली। अब तक शीतलहर से मरने वालों का आंकड़ा पचास से ऊपर जा पहुंचा है। पिछले साल भी सौ से ऊपर था। लेकिन अबकी बार सर्दी का कहर जानलेवा है। लेह में तापमान -22 डिग्री तक जा पहुंचा है तथा कारगिल में हिमांक से 18 डिग्री नीचे तक जा पहुंचा है। ऐसे में देश के उन जवानों को श्रद्धापूर्वक याद किया जाना चाहिए जो रक्त जमाती सर्दी में सीमाओं की रक्षा में जुटे हैं। साइबेरिया व अन्य ठंडे प्रदेशों से भारत आने वाले प्रवासी पक्षी भी मौसम के बदलते तेवर देखकर हैरत में हैं और गर्म झरनों की तलाश में भटक रहे हैं। लेकिन गिरते पारे के रिकॉर्ड ने पक्षियों ही नहीं आदमी को भी हैरत में डाल दिया है। पारे में गिरावट के तमाम रिकॉर्ड टूट रहे हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी डरा रही है कि मौसम के तेवर में हाल-फिलहाल सुधार की गुंजाइश नहीं है। इस रक्त जमाती सर्दी में इससे बचाने की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई है। सर्दी ने ऐसा सितम ढहाया है कि बच्चे-बूढ़े सभी बेदम है। कड़ाके की सर्दी ने अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा कर दी है। लोग जैसे-तैसे सर्दी से लोहा लेने की कोशिश कर रहे हैं। सूरज देव के दर्शन दुर्लभ हो चले हैं। भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में सर्दी का ये आलम चौंकाने वाला है। मौसम विज्ञानी दलील दे रहे हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह अप्रत्याशित ठंड पड़ रही है। लेकिन विज्ञानियों का एक समूह ऐसा भी है जो इसे हिमयुग की दस्तक मान रहा है। यूरोप में तो बर्फबारी के तमाम रिकार्ड टूट चुके हैं। इसका दूरगामी प्रवाह अंतर्राष्ट्रीय तापमान पर निश्चित पड़ेगा। दुनियाभर में मौसम की गड़बड़ी सामने आ रही है जिसे ग्लोबल कूलिंग की दस्तक के रूप में देखा जा रहा है। देहरादून स्थित बहुचर्चित वाडिया इंस्टिच्यूट आॅफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों का मानना है कि ये हिमयुग की शुरुआत की दस्तकभर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत में इसके प्रभाव बड़े पैमाने पर नजर आएंगे जिसके कारण आने वाले दशकों में तापमान गिरता ही जाएगा। यूरोप में होने वाली अप्रत्याशित बर्फबारी को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। इसमें गर्मी का मौसम सर्दी के मुकाबले कम रहने के आसार हैं। धीरे-धीरे बर्फबारी का स्तर बढ़ता जाएगा जो फिर जानलेवा स्तर तक जा पहुंचेगा। वाडिया इंस्टिच्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके पास हिमयुग के आंकड़े उपलब्ध हैं जो 13वीं से 17वीं सदी के बीच के हैं। बहरहाल, हड्डियों में सिहरन पैदा करने वाली सर्दी से आम आदमी आसन्न खतरे की आहट तो महसूस कर ही रहा है। कश्मीर, उत्तराखंड व हिमाचल के कई इलाकों में हो रही अत्यधिक बर्फबारी व बारिश से मैदानी इलाके ठिठुर रहे हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर विश्वास करें तो इस सर्दी से फिलहाल राहत मिलने वाली नहीं है। हालांकि, मोटे-मोटे कपड़े भी राहत नहीं दे रहे हैं लेकिन फिर भी ठंड से लोहा लेने का हौसला तो जुटाना ही होगा।
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Salute to all the members of Indian Army who is saving ans standing to save us and let us live peacefully !!!
ReplyDeleteGovt should wake up now and stop all these corruptions !!!