photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Monday, August 9, 2010
यह कैसी फ्रेंडशिप
फ्रेंडशिप डे पर देशभर में रविवार को जो कुछ भी हुआ वह कोरी जिद की टकराहट का परिणाम था। न तो इसका फ्रेंडशिप से कोई लेना देना था और न ही हिन्दुत्व या राष्ट्रीयता की भावना से। एक तरफ जहां युवा मनमानी की जिद पर अड़े हैं वहीं ऐसे युवा, जिन्हें यह सुख हासिल नहीं उनकी मिट्टी पलीद करने में जुटे हैं। कम से कम इस मामले में प्रशासन उत्पातियों के साथ है क्योंकि इनका उत्पात प्रत्यक्ष है पर छोटा है। यह न तो सतयुग है और न द्वापर। अब कृष्ण और सुदामा नहीं होते। अब तो रईस बापों की बिगड़ैल औलादें सिम्बायसिस में मैनेजमेन्ट पढ़ती हैं। उनका मैनेजमेन्ट फंडा आम आदमी से अलग होना ही चाहिए। फ्रेंडशिप का मतलब अब मुंह में केक का क्रीम पोतकर एक दूसरे की गोद में बैठना हो गया है ताकि एक दूसरे के गालों को चाट कर साफ किया जा सके। किसी को दिक्कत भी नहीं है। जब किसी का 90 फीसदी ध्यान अपने तन को सजाने संवारने में हो तो उसका हासिल इससे जुदा नहीं हो सकता। आपका जिस्म है, आप जानो या आपके माडर्न माँ-बाप जानें। समाज को दिक्कत तब होती है जब आप शिकायत लेकर थाने पहुंचती हो। कभी कहती हो कि आपके बायफ्रेंड ने आपका एमएमएस बना लिया और अब ब्लैकमेल कर रहा है। कभी फूला हुआ पेट लेकर सहानुभूति बटोरने निकल पड़ती हो। हर बार वही कहानी। लड़के ने शादी का झांसा दिया। झांसा इतना तगड़ा था कि शादी से पहले ही हनीमून मना लिया। कई-कई साल तक मिल कर मजे किए और फिर आरोप लड़के पर मढ़ दिया कि उसने दैहिक शोषण किया। समाज को भरमाने के लिए मीडिया और कानून ने शब्दों का इजाद भले ही कर लिया हो किन्तु मेडिकल साइंस की राय इससे जुदा है। लंबे रिश्ते कभी एकतरफा नहीं होते। आप किसी मजबूरी में नहीं बंधी हुर्इं कि आपका शोषण किया जा सके। आपकी मजबूरी आपकी अपनी इच्छाएं हैं। बार-बार ठगी जा रही हैं फिर भी नहीं चेत रहीं। आपको एक बार भी नहीं सूझता कि जो युवक अपने माँ-बाप, भाई-बहन को धोखा देकर आपका साथ निभाने की कसमें खा रहा है वह किसी का नहीं। आप यह भी नहीं समझना चाहतीं कि कानून चाहे जो कहे किन्तु प्रकृति ने पुरुष और नारी को अलग-अलग बनाया है। आप अपनी लड़ाई खुद लड़ने निकल पड़ी हैं। कानून आपको हादसों से नहीं बचा सकता। हादसों के बाद हद से हद दोषी को सजा और आपको मुआवजा दिला सकता है। आप माडर्न बनें इसमें किसी को दिक्कत नहीं। बस इतनी मेहरबानी करें कि कुंवारी माँ बनें तो ठसन के साथ अकेले ही उसकी परवरिश करें। लड़का आपको छोड़े तो आप भी किसी दूसरे को पकड़ लें। पश्चिम हो या पूर्व किसी भी संस्कृति की आधी अधूरी नकल हमेशा तकलीफदेह होती है।
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