Monday, August 9, 2010

पुलिस, कुत्ता और आम आदमी

आॅनर किलिंग के मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई। जस्टिस शिव नारायण धींगड़ा ने कहा कि बॉस का कुत्ता खो जाए तो फोटो लेकर आप पूरा शहर छानते हैं, मगर लोगों को सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। जब आपको शर्म ही नहीं, तो मानवीयता के बारे में क्या बात की जाए। जस्टिस धींगड़ा का यह बयान दो वर्ष पूर्व 30 मार्च 2008 की उस घटना से जुड़कर आया, जिसमें दिल्ली के पुलिस कमिश्नर का कुत्ता खो गया था और पुलिसवालों ने उसकी तलाश में पूरे शहर को छान डाला था। लोगों को आॅनर किलिंग के मामले में न बचा पाने पर पुलिस की खिंचाई करते हुए जस्टिस धींगड़ा ने कहा कि पुलिस पैसे के लिए संबंधित परिवारों से मिली हुई दिखती है। अदालत ने यह बात तब कही, जब विधिक सेवा सहायता प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता किरण सिंह ने बताया कि अपनी मर्जी से शादी करने वाली एक गर्भवती युवती इन दिनों अपनी सौतेली माँ के हाथों प्रताड़ित हो रही है जबकि पुलिस की कृपा से उसका शौहर जेल में बंद है। मेडिकल रिपोर्ट में लड़की 18 के करीब की बताई गई है जबकि लड़की वालों के कहने पर पुलिस ने 15 साल की किशोरी का मामला दर्ज कर रखा है। पुलिस ऐसा अकसर करती है। तबादले पर आने वाला हर एसपी-आईजी एक ही बात कहता है कि पुलिस आम लोगों की हिफाजत के लिए है। पुलिस अपना व्यवहार सुधारेगी। कर्त्तव्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदि-आदि। किन्तु होता यही है कि मामूली चोरी की रिपोर्ट लिखाने के लिए भी आदमी मोहल्ले के नेता या पत्रकार के संरक्षण में ही थाना पहुंचने की हिम्मत जुटा पाता है। ऐसे लोगों की मौजूदगी में ही पुलिस का व्यवहार ठीक-ठाक रहता है। वरना वह किसे अबे! कहेगी और किसे साला बनाएगी इसका कोई ठिकाना नहीं रहता। कहते हैं कि काम की अधिकता और बहुत कम आराम के कारण पुलिस तनाव में रहती है, चिड़चिड़ाती है। तो क्या इस तरह से उसका तनाव कम हो सकता है। तनाव कम करने का सबसे बढ़िया नुस्खा तो यही है कि सुबह-सुबह चार काम अच्छे कर लो तो मन दिन भर तृप्त रहता है। व्यवहार अच्छा रहेगा तो अपनी शिकायत लेकर आम आदमी अकेला आएगा। थाने के कामकाज में नेता नुमा लोगों की दखलअंदाजी कम होगी। सब तरफ सुकून होगा। आप अपनी ही आफिस में बार-बार कुर्सी छोड़कर उठने और फोन पर आला अफसरों की बक-झक सुनने से बच जाएंगे। एक बार आजमा कर तो देखें.. फायदा ही फायदा नजर आएगा।

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