Monday, August 9, 2010

शाबास मधुसूदन

मधुसूदन दीप नाम के एक और ध्रुवतारा दुर्ग के आकाश में स्थापित हो गया। अमनदीप की तस्वीर से प्रेरणा लेकर शक्तितोलन की दिशा में आगे बढ़ने वाले मधुसूदन ने एकलव्य जैसी निष्ठा के साथ अपने कदम आगे बढ़ाए और शरीर सौष्ठव से भारोत्तोलन और फिर शक्तितोलन तक पहुंच गया। वह अभी अभी बालिग हुआ है और उसके सामने संभावनाओं का अनंत आकाश है। मधुसूदन की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि वह एक साधारण रिक्शाचालक के परिवार से है। जिनका बॉडी बिल्डिंग या वेट लिफ्टिंग से वास्ता रहा है, उन्हें इस बात का बाखूबी पता होगा कि यह खेल एक अकेला बालक नहीं खेलता। इसमें उसका पूरा परिवार धीरे-धीरे सुलगता है। हम सभी ने महाबली खली के बारे में पढ़ा है। जिला पुलिस के शरीर सौष्ठव के खिलाड़ी पी सोलोमन के बारे में भी पढ़ा है। हमने देखा है कि किस तरह एक परिवार के सभी सदस्य अपनी थाली से एक एक कौर निकालकर अपने एक सदस्य के लिए आवश्यक खुराक जुटाता है। किस तरह उसके शरीर में बढ़ने वाली पेशियों की सरसराहट अपने भीतर महसूस करता है। मधुसूदन के लिए तो यह और भी कष्टदायी था। एक तो नन्ही सी उम्र ऊपर से अभावों का परिवार। जब उसकी उम्र के लड़के केवल बाल संवारते, स्टाइल मारते घूमते हैं तब वह पूरी निष्ठा से अपने खेल के प्रति समर्पित हो गया। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने छोटी उम्र में ही एक होटल में नौकरी की। पढ़ाई लिखाई के साथ साथ उसने अपनी हाबी की साधना जारी रखी। यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि सफलता किसी खास करियर में नहीं छिपी होती। आप किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकते हैं। शर्त सिर्फ यही होती है कि आपकी उसमें रुचि हो, आप उसमें स्वयं को साबित करने के लिए पूरी ताकत से जुट जाएं और किसी भी सूरत में अपना ध्यान बंटने न दें। फिर चाहे वह पहाड़ चढ़ने का शौक हो, घुड़सवारी का, शक्तिशाली बनने का शौक हो या साहब बनने का, आपकी मंजिल आपसे अधिक दूर नहीं होती। आधे अधूरे मन से की गई पढ़ाई से आप डाक्टर-इंजीनियर भी बन जाएं तो अपने लिए वह खास जगह नहीं बना सकते जिसका लोग छात्र जीवन में सपना देखा करते हैं। देश में लाखों आईपीएस हैं किन्तु किरण बेदी जैसी अफसर गिनती के। कुछ ऐसा ही आईएएस, चिकित्सा, विज्ञान या किसी भी अन्य क्षेत्र में है। लोग एक मुकाम पर आकर ठहर जाते हैं और भीड़ में खो जाते हैं किन्तु पी. सालोमन और मधुसूदन जैसे लोग निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं और उनका पद नहीं उनका नाम एक उज्ज्वल नक्षत्र की तरह ज्वाजल्यमान बना रहता है। ठीक ध्रुवतारे की तरह जो लाखों करोड़ों तारों के बीच अपनी नाम से पहचाने जाते हैं।

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