Wednesday, May 12, 2010

सीमाओं पर किन्नर

महाभारत के युद्ध में अर्जुन और भीष्मपितामह आमने सामने थे। भीष्मपितामह अजेय थे। महापराक्रमी थे। अर्जुन के लिए बिना छल, बल, कौशल के उनसे जीतना असंभव था। ऐसे समय में श्रीकृष्ण को शिखण्डी की याद आई। शिखण्डी पूर्व जन्म में अम्बा थी। अम्बा वही राजकुमारी थी जिसके प्रणय निवेदन को भीष्म ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि वे आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने को विवश हैं। अम्बा ने तपस्या कर अपने प्राण त्याग दिए थे तथा दूसरे जन्म में उसने राजा द्रुपद के घर जन्म लिया। उसे किन्नर का तन मिला था किन्तु उसे पुरुषों की तरह पाला गया। वह विकट योद्धा बना। श्रीकृष्ण को पता था कि भीष्म शिखण्डी को अम्बा के रूप में पहचान जाएंगे तथा अपने हथियार नीचे कर लेंगे, क्योंकि एक ब्रह्मचारी स्त्री पर हमला नहीं करेगा। युद्ध में ऐसा ही हुआ और अर्जुन ने शिखण्डी की आड़ लेकर भीष्म पर तीरों की वर्षा कर दी। संभवत: इसी से प्रेरित होकर अरुणाचलप्रदेश के गृहमंत्री टाको डाबी ने देश की सीमाओं की रखवाली के लिए किन्नरों की रेजीमेंट बनाने का सुझाव दिया है। डाबी ने कहा कि मेरे ख्याल से अगर किन्नरों को पुलिस या अर्धसैनिक बलों में नियुक्त किया जाए तो वे राष्ट्र की बेहतर सेवा करेंगे। डाबी इस बारे में पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री चिदंबरम को पत्र भेज चुके हैं। उन्होंने लिखा है कि यह समुदाय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अपना कर्तव्य प्रभावी तरीके से निभा पाएगा। देश में करीब 10 लाख किन्नर हैं। किन्तु समझ में यह नहीं आया कि वे दुश्मनों से भीष्म की तरह के आचरण की अपेक्षा किस बिना पर कर रहे हैं। हमारे दुश्मनों में ऐसा कौन है जो स्त्री या पूर्व प्रेमिका को देखकर शस्त्र झुका लेगा? या शायद वे यह सोच रहे हैं कि किन्नरों के चूंकि बाल बच्चे नहीं होते, रिश्तेदारों से सम्पर्क टूट चुका होता है, इसलिए उनमें धन संपत्ति के प्रति आग्रह कम होगा। ऐसे लोगों को खरीदना आसान नहीं होगा। न तो उन्हें रुपयों का लालच दिया जा सकेगा और न ही उन्हें प्रेम जाल में फांसा जा सकेगा। आइडिया बुरा नहीं है। ट्राइ करने में हर्ज भी क्या है? वैसे केवल सेना ही क्यों यदि सांसद और विधायक बनने के लिए भी किन्नर होना अनिवार्य कर दिया जाए तो क्या बुरा है? और फिर अगर आईएएस और आईपीएस भी किन्नर ही हों तो देश का वास्तव में भला हो जाएगा। वैसे किन्नर इस चूहा बिल्ली के खेल में शामिल होने की हामी भरेंगे इसमें पर्याप्त संदेह है।

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