photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Thursday, May 20, 2010
आतंक का भयावह होता चेहरा
आतंक को आतंक से कुचलने का मिशन फेल हो चुका है। भारत ने ही कभी यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था कि हिंसा से हिंसा खत्म नहीं की जा सकती किन्तु हमने इन सिद्धांतों को कब का भुला दिया है। यदि शक्ति की बात करें तो संप्रति विश्व की सबसे बड़ी ताकत है अमरीका। अमरीका अपना मतलब निकालने के लिए सदैव ताकत का इस्तेमाल करता आया है। अपने दुश्मनों को निपटाने की उसकी कोशिशें कहां तक कामयाब हुई हैं, यह किसी को बताए जाने की जरूरत नहीं। बावजूद इसके ताकत में हमारी न तो आस्था कम हुई है और न विश्वास। हमने कांटे से कांटा निकालने और लोहे से लोहा काटने की उक्तियों को तो खूब याद रखा है किन्तु उससे कहीं अधिक सहूलियत के साथ उस कहावत को भुला दिया है कि विनम्रता सबसे बड़ा हथियार है। नक्सलियों के खिलाफ हमारे प्रयास भी कुछ ऐसे ही हैं। हम न केवल यह लड़ाई आधे मन से लड़ रहे हैं बल्कि बातचीत की पेशकश भी आधे-अधूरे मन से ही कर रहे हैं। आजाद भारत के इतिहास में थोड़ा पीछे लौट कर देखें तो हम पाएंगे कि जिस चम्बल के बीहड़ों में जाने का रास्ता नहीं मिलता था, वहां के बागियों को आगे लाने में गांधीवाद ही सफल रहा था। चीन ने अपनी ताकत दादागिरी से नहीं बढ़ाई। परमाणु हमले का शिकार हुआ जापान राख के ढेर में से उठ खड़ा हुआ। पर हमें यह सब दिखाई नहीं देता। हमें उपभोक्तावादी पश्चिम दिखाई देता है जहां मुंहासे और बरहट का इलाज भी शल्यक्रिया या प्लास्टिक सर्जरी है। अमरीका ने हिंसा को बढ़ावा दिया और आज खुद बारूद के ढेर पर बैठा चेतावनियां जारी कर रहा है। पाकिस्तान ने भारत को परेशान करने के लिए युद्ध, आतंक और हथियारों की होड़ शुरू की जिसमें अमरीका का ही लाभ हुआ। ये डरे हुए पहलवान अब केवल चेतावनियां जारी कर रहे हैं। नई चेतावनी भारत के लिए हैं। आतंकी अब स्कूलों को निशाना बना सकते हैं। यदि एक भी ऐसा हमला हुआ तो क्या होगा इसका खाका खींचने की जरूरत नहीं है। असहाय सरकार ने स्कूलों की सुरक्षा बढ़ाए जाने के निर्देश जारी कर दिए। यह निर्देश कितना नपुंसक है, कहने की भी आवश्यकता नहीं। आप आतंकियों को ठेलते जाइए, वे आपके मर्म स्थलों पर वार करेंगे। क्या अब भी यह कहने की जरूरत है कि आतंक के खिलाफ रणनीति बनाना रक्षा विशेषज्ञों का काम नहीं है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment