photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Monday, May 31, 2010
जान का दुश्मन कैमरा मोबाइल
मध्यप्रदेश के छतरपुर में पुलिस वालों ने एक जोड़े को पार्क में पकड़ा। उन्होंने छोरे का कैमरा मोबाइल छीन लिया और उसे मारपीट कर भगा दिया। छोरी को वे एक खाली दुकान में ले गए और वहां उसकी अश्लील वीडियो बनाई। इसके बाद लड़की को भी छोड़ दिया। अब जोड़े की जान कैमरा मोबाइल में अटक गई। वे उसे वापस पाने के लिए चिरौरी-विनती करने लगे। पुलिस को इसी का इंतजार था। उन्होंने दस हजार रुपए की मांग कर दी। यह एक बड़ी रकम थी। ऊपर से पैसे देने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि एमएमएस का अस्तित्व मिट जाएगा या मोबाइल वापस मिल जाएगा। हिम्मत करके उन्होंने इसकी रिपोर्ट दर्ज करा दी। बस फिर क्या था। पुलिस ने संगठित गिरोह की तरह उन्हें डराना धमकाना शुरू कर दिया। किशोरी और उसकी 14 वर्ष की छोटी बहन इतना डर गई कि अपने टीचर पिता का सामना करने के बजाय उन्होंने आत्महत्या कर ली। पुलिस वाले सस्पेंड हो गए। उनसे कैमरा मोबाइल बरामद हो गया किन्तु एमएमएस डिलीट हो चुका था। एक अन्य घटना में पांच साल पहले वडोदरा शिक्षा महाविद्यालय में एक महिला प्रशिक्षार्थी ने अपनी सहेली का बाथरूम में एमएमएस बना लिया। इसे उसने अपने मित्र को भेज दिया। मित्र ने एमएमएस कुछ और लोगों को भेज दिया। मामला पकड़ में आया पर कुछ खास कार्रवाई नहीं हुई। पहला मामला वसूली का था जबकि दूसरा मामला मजा लेने का। चित्रकारी और मूर्तिकला आरंभ से ही मनुष्य की फितरत में शामिल है। जब कैमरा नहीं था लोग पोट्रेट बनवाया करते थे। फिर स्टिल कैमरा आया। फोटोग्राफी तब भी आसान नहीं थी। आम लोगों के लिए उतनी प्राइवेट भी नहीं थी। वे फोटो तो खींचते थे किन्तु फिल्म धुलवाने और प्रिंट बनवाने के लिए वे स्टूडियो या कलर लैब पर निर्भर थे। मूवी कैमरा आम आदमी के लिए नहीं था। लोगों ने मजबूरी में अपनी आदिम इच्छाओं को दबाए रखा था। इस बीच डिजिटल फोटोग्राफी का दौर शुरू हो गया। फोटोग्राफी न केवल सस्ती हो गई बल्कि प्राइवेसी की गारंटी हो गई। स्टूडियो या प्रोसेसिंग लैब का झंझट खत्म हो गया। जब चाहो खींचो, चुटकियों में नेट पर डालो, साथियों को भेजो। पकड़े जाओ तो चुटकियों में डिलीट कर दो। अकेला कैमरा संदिग्ध उपकरण था। इसकी भी राह निकल आई। कैमरा मोबाइल में इनबिल्ट हो गया। अब कोई नहीं बता सकता कि आप फोन पर बात कर रहे हैं या किसी की वीडियो रिकार्डिंग कर रहे हैं। लोग इसका खूब लाभ उठा रहे हैं। अब कोई भी इससे सुरक्षित नहीं। कब कौन किसकी एमएमएस बना लेगा कहना मुश्किल है। अब तो बस एक ही चारा रह गया है कि लोग जेम्स बाण्ड की फिल्में देखें। हर किसी पर शक करना सीखें। बेडरूम-बाथरूम का खास ध्यान रखें। खिड़की, वेन्टीलेटर की नियमित चेकिंग करें, दरवाजे, दराज के हैण्डल, नॉब, की होल्स, गुलदस्ता सबकुछ चेक करने के बाद ही अपनी प्राइवेसी के प्रति सुनिश्चित हों। ऐसा करते समय इस बात का भी ख्याल रखें कि चीनी स्पाई कैमरा, कैमरा पेन, कैमरा बटन का आकार एक-डेढ़ सेन्टीमीटर तक छोटा हो सकता है। हाईटेक जिन्दगी मुबारक हो।
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