Monday, August 9, 2010

शिक्षा और वेश्यावृत्ति

नौकरी के लिए क्वालिफिकेशन चाहिए। क्वालिफिकेशन के लिए पैसे चाहिए। शिक्षा बेहद महंगी हो चुकी है। आपके परिवार के पास पैसे नहीं हैं। बैंक से ऋण लेना आसान नहीं है। आपके पास जिस्म है। बाजार में ग्राहकों की कमी नहीं है। आप किसी भी कीमत पर पढ़ना चाहती हैं। लिहाजा सौदा हो रहा है। विकसित देशों में तो अब बाकायदा उसी तरह जिस्मों की नीलामी हो रही है जिस तरह बताते हैं कि किसी जमाने में कोठे पर नथ उतराई की बोली लगाई जाती थी। फर्क केवल इतना है कि अब लड़की खुद अपनी नीलामी करती है। अब वह ग्राहकों की मंडी में नहीं खड़ी होती। कामातुर निगाहें उसे नहीं घूरतीं। यह नीलामी बेहद सभ्य ढंग से ई-बे नामक आनलाइन नीलामी साइट पर की जाती है। हाल ही में ब्रिटेन की मिस स्प्रिंग ने अपने जिस्म को नीलाम किया, दो लाख पाउंड में। इससे वह न केवल अपनी मेडिकल पढ़ाई का खर्च निकाल पाएगी बल्कि इस पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज को भी चुका पाएगी। भारत भी तेजी से इसी दिशा में बढ़ रहा है। सिम्बायसिस जैसी प्रबंधन संस्थान की छात्राएं कालगर्ल रैकेट में पकड़ी गई हैं। इतिहास में पढ़ा था कि किसी जमाने में शिक्षा पर आभिजात्य वर्ग का ही अधिकार था। केवल राजा, मंत्री और सेनापति के पुत्रों को ही विद्यादान किया जाता था। पढ़ा यह भी था कि वेदमंत्र सुन लेने मात्र से शूद्रों के कानों में पिघला शीशा डलवा दिया जाता था। रजवाड़े खत्म हो गए, जमींदारी छिन गई, जाति प्रथा भी टूट गई किन्तु समाज आज भी बंटा हुआ है। आज का गरीब शूद्र है। गरीब तो क्या निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की हालत भी खास अच्छी नहीं है। सरकारें गरीबों के सशक्तिकरण के बजाय उन्हें भिखारी बनाकर और नीचे धकेलने का प्रयास कर रही हैं। अच्छा भोजन, अच्छी शिक्षा, अच्छा आवास सबकुछ अब मुट्ठीभर लोगों के लिए सुरक्षित-संरक्षित हो गया है। हर कोई अपनी-अपनी क्षमताओं, विशेषताओं, विशिष्टताओं की कीमत लगवा रहा है। उपभोक्तावाद चरम पर है। ऐसे में किसी को नैतिकता का भाषण देना घूरे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक करने जैसा है। दूसरी तरफ सुरा-सुन्दरी के धंधे में लोग रातों रात लखपति-करोड़पति बन रहे हैं। इनकी मांगें बढ़ रही है। अब लड़ने भिड़ने के दिन नहीं रहे। लिहाजा वे खरीद रहे हैं। आजादी को तिरेसठ साल ही हुए हैं और भारत की जमीन, नदियां, तालाबों का सौदा होने लगा है। बावला पाकिस्तान कुछ हजार वर्ग किलोमीटर जमीन के लिए पिछले 50 सालों से युद्ध कर रहा है। किसी दलाल को बयाना दे दिया होता तो कश्मीर कबका उसका हो चुका होता।

1 comment:

  1. Kisi jamane me siksha daan ki jaati thi, bachpan se yehi sunte aaye ki gyaan baatne se badhta hai par ab to Siksha Vyasaya ban gai hai. Middile class family jab apne baccho ko acche school me padhate hai to unka sab kuch unki padhai me lag jata hai.

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