photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Sunday, May 16, 2010
यातायात का दबाव
राजधानी रायपुर में बस स्टैण्ड का विकेन्द्रीकरण हो रहा है। बहाना यह है कि इससे शहर पर बढ़ रहा यातायात का दबाव कम हो जाएगा। इससे लोगों को कुछ दिक्कतें भी होंगी किन्तु शासन का कहना है कि दिक्कतों को दूर कर लिया जाएगा। बिलासपुर की तरफ से आने वाली बसें अब रावांभाठा में रुक जाया करेंगी। धमतरी जाने की बसें डूमरतराई से मिलेंगी। महासमुंद और उड़ीसा जाने वाली बसें एग्रीकल्चर कालेज के पास ठहरेंगी। अलबत्ता भिलाई-दुर्ग, नागपुर से आने वाली बसें कहां रुकेंगी यह अभी स्पष्ट नहीं है। संभवत: ये बसें टाटीबंद में कहीं रुकेंगी। कहा गया है कि इन सभी बस स्टैण्डों के बीच सिटी बस की कनेक्टिविटी होगी तथा यात्रियों को परेशान होने नहीं दिया जाएगा। केन्द्रीयकृत बस स्टैण्ड में एक बस से उतर कर दूसरा पकड़ने के बीच 5 से 10 मिनट का फासला होता है। यह फासला बढ़कर आधे से एक घंटा हो जाएगा। क्या फर्क पड़ता है। हमारे देश में वक्त की वैसे भी कहां कोई कीमत है। अब आते हैं लाभ पर। राज्य को सिटी बस सर्विस के तहत सौ बसें और मिलने वाली हैं। फिलहाल सिटी बस घाटे में है। सिटी बस का लाभ बढ़ाया जाना जरूरी है। इसलिए उसके लिए काम निकाला गया है। बड़े लोग अपने बच्चों को एस्टाब्लिश करने के लिए अकसर ऐसा करते हैं। कभी यह कोटा और ठेका होता था अब बड़े बड़े व्यवसाय इसमें जुड़ गए हैं। दूसरा लाभ यह गिनाया गया है कि यातायात का दबाव कम होगा। छह पेग लगाने के बाद भी शराबी की कल्पना शक्ति इतनी ऊंची छलांग नहीं लगा पाती। शहर की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। सड़कों के किनारे खड़े वाहनो की वजह से सड़कें संकरी हो गई हैं। गाड़ियों की चौड़ाई बेवजह बढ़ रही है। कारों का हुजूम सड़कों पर उतर आया है। बाइकों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है। इसमें से सभी लोग शौक से ऐसा कर रहे हों, जरूरी नहीं है। कुछ लोग मजबूरी में दस हजार की नौकरी में तीन हजार रुपए का पेट्रोल फंूक रहे हैं। रेलवे की रहमदिली ने हर दूसरी ट्रेन को सुपरफास्ट बना दिया है। मिनी बसों के रूट का कोई ठिकाना नहीं है। कभी वह पचपेड़ी नाका से होकर जाती है तो कभी संतोषी नगर से। मूड बना तो भाठागांव से घुसकर भी पुलिस लाइन पर निकल आती है। सिटी बसों का कोई टाइमटेबल नहीं है। उसे टिकट चेक करने वाला जहां चाहे 10-15 मिनट के लिए रोक सकता है। आटो वाला अपनी मर्जी का मालिक है। लिहाजा जिसे वक्त पर ड्यूटी पहुंचना होता है, वह मजबूरी में अपने वाहन का इस्तेमाल करता है। इसलिए बढ़ता जाता है यातायात पर दबाव। जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट हाशिए पर हो तो लोग मजबूरी में भी गाड़ियां खरीदते हैं। और जब कुछ समय तक वे अपनी गाड़ी का उपयोग कर चुके होते हैं तो उन्हें मिनी बस, सिटी बस कष्ट देने लगती लगती हैं। जिसकी ड्यूटी रात 8 बजे या उसके बाद खत्म होती हो, यदि उसे लौटने का सार्वजनिक साधन न मिले तो दिन में काम पर आने के लिए भी वह निजी साधनों का उपयोग करने के लिए मजबूर हो जाता है। आप उसकी मजबूरी खत्म कर दीजिए, यातायात का दबाव अपने आप कम हो जाएगा।
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aapne bilkul sahi kahaa hai, ye to koi b samajh sakta hai ki isse koi fayda nahi hone wala hai..albatta sabki paresaani badhne waali hai.
ReplyDeleteBahar se aane wale logo ko sabse jyada problem hone wali hai. aur ye bhi baat hai ki kiraya to kam hone wala nahi hai.. bas kahi b ruke, + citi bus ka rent. aur uper se bus waalo ki khatpat jo main bilkul bardast nahi kar sakta..isliye maine to bus se travel karna chor diya.. motorcycle ka use karna jyada accha lagta hai. kyonki paise b lagbhag utne hi kharch hote hai.