Sunday, April 18, 2010

स्पोकन इंग्लिश

मातृ भाषा और मोहल्ला भाषा से इतर इन दिनों बोलचाल की तीसरी भाषा अंग्रेजी हो गई है। हर कोई अंग्रेजी बोल रहा है या बोलने की कोशिश कर रहा है। अंग्रेजी के चार अक्षर बोल पाना शिक्षित होने की गारंटी हो गई है। वैसे अधिकांश धाराप्रवाह हिंग्लिश बोलते हैं। जिन्हें हिंग्लिश नहीं आती वे इतना क्लिष्ट इंग्लिश बोलते हैं कि अंग्रेजों की समझ में भी शायद ही आए। अंग्रेजी के कुछ फिकरे तो तकियाकलाम हो गए हैं। बाजार में थैला लिये एक मित्र मिला। बहुत दिनों बाद मिले थे। देखते ही चिल्लाया, ‘हाय!’ मेरे मुंह से भी निकल गया ‘हल्लो!’ करीब आते ही उसने मेरे कंधे पर हाथ मारा, एक हाथ दूर खड़ा होकर गौर से नीचे से ऊपर तक देखा और फिर बोला, ‘तुम आज भी बिल्कुल वैसे ही हो, यू..नो! बिल्कुल भी नहीं बदले।’ यह बात और है कि मैं बिल्कुल नहीं बदला, यह बात मुझे नहीं मालूम तो और किसे मालूम। सब्जी मंडी के बीच की संकरी सी राह पर हम फैल कर खड़े थे। तभी किसी पसरा वाले ने सांड को लाठी दे मारी। सांड तेजी से हमारे बाजू से निकला और मित्र का थैला उसकी चपेट में आ गया। कुछ टमाटर उछल कर जमीन पर आ गिरे। मित्र के मुंह से निकला, ‘ओह शिट्!’ समझ में नहीं आया ‘शिट्’ उसने टमाटर को कहा या सांड को, अलबत्ता असर किसी को नहीं हुआ। बातचीत के बीच-बीच में वह कहता, ‘ओ..खे, ओ..खे’। थोड़ी देर में समझ आ गया कि यह ओक़े का स्टाइलिश उच्चारण है। मेरी एक मित्र हैं जो अंग्रेजी अच्छी खासी बोलती हैं पर हर वाक्य के अंत में ‘ना’ बोलने की आदत है। कहेगा, ‘ही इज़ सो हैण्डसम, ना..’। मिनी बस के कंडक्टर से लेकर, रेहड़ी पर ककड़ी बेचने वाला भी अंग्रेजी के कुछ शब्द बोलता है। कहते हैं जब डिमाण्ड अच्छी हो तो सप्लाई की कीमत बढ़ जाती है। लोग इसलिए अब इंग्लिश सीखने जाते हैं। इसके लिए अच्छी खासी फीस अदा करते हैं। स्पोकन इंग्लिश की क्लास में ग्रामर सीखते हैं। पूरे ग्रामर के साथ जब वे अंग्रेजी बोलने की कोशिश करते हैं तो सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है। उसकी हालत ठीक वैसी ही होती है जैसी नए सिंगर की रफी साहब के गीत गाते समय होती है। कुछ शब्द अंदर जाती सांस के साथ अंदर चले जाते हैं। हक़ीकत तो यही है कि बोलचाल की भाषा में ग्रामर का कोई रोल नहीं होता। वैसे भी भाषा में ग्रामर बाल की खाल उधेड़ने वाला काम है। किसी ने भी अपनी मातृभाषा का ग्रामर नहीं पढ़ा होता किन्तु इससे उसकी संप्रेषण क्षमता में कोई कमी नहीं आती। आप अंग्रेजी पढ़ते हैं, अंग्रेजी सुनते हैं, अंग्रेजी बोलते हैं तो यह भाषा आप सीख सकते हैं। आप जितना अधिक पढ़ते और सुनते हैं उतना ही आपका शब्द भंडार बढ़ता जाता है। कोई शब्द एडजेक्ट्वि है या वर्ब, नाउन है या प्रोनाउन, यह अगर आपको नहीं भी पता है तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे फर्राटे की ग्रामर वाली स्पोकन इंग्लिश सुननी हो तो निजी स्कूलों के प्रिंसिपल मैम के भाषण सुन लो। यदि बदकिस्मती से आपको अंग्रेजी आती हो तो राजू श्रीवास्तव फेल हो जाएगा। यह मुफ्त का लाफ्टर चैलेंज प्रोग्राम है। यह वैसा ही चुटकुला है जैसा कि कापी किताब लेकर स्पोकन इंग्लिश सीखने जाना।

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