photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Friday, April 23, 2010
लेडीज टायलेट में स्पाईकैम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक कॉल सेंटर के लेडीज टॉइलेट में स्पाई कैम रखने के मामले को एक साधारण आपराधिक मामला समझकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह की घटना का मतलब है कि बीपीओ जैसे सबसे आधुनिक समझे जाने वाले क्षेत्र में भी अब तक ऐसा माहौल नहीं बन सका है कि वहां कामकाजी महिलाएं अपनी सुरक्षा और सम्मान को लेकर निश्चिंत हो सकें। गौरतलब है कि जब सरकार ने फैक्टरीज ऐक्ट-1948 में संशोधन कर टेक्स्टाइल और आईटी सेक्टर में महिलाओं से नाइट शिफ्ट में काम लेने की अनुमति दी, तब स्त्रियों के कामकाज के दायरे का और विस्तार हुआ। हाल के वर्षों में कॉल सेंटरों ने बड़ी संख्या में लड़कियों को रोजगार दिए हैं। लेकिन कई जगहों पर नाइट शिफ्ट में काम करके लौट रही लड़कियों के साथ लूटपाट और छेड़छाड़ की घटनाएं घटीं। कई मामलों में तो कॉल सेंटर के ड्राइवर और दूसरे कर्मचारी ही उसमें लिप्त पाए गए। बेंगलुरु में कॉल सेंटर की एक लड़की के साथ रेप और उसकी हत्या की घटना आज भी सबको याद है। इसके बाद काफी हो-हल्ला मचा था और अनेक कंपनियों ने अपनी महिला कर्मचारियों की सिक्युरिटी को लेकर कई अहम कदम उठाए थे। इस संबंध में कई नए मानदंड भी तय किए गए। जाहिर है उसके बाद से स्थिति थोड़ी बहुत बदली है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। नियम-कायदे बनाने का फायदा भी तभी होगा जब समाज की सोच बदले। चाहे बीपीओ सेक्टर हो या कोई और क्षेत्र, पुरुषवादी मानसिकता हर जगह हावी है। पुरुषों का एक बड़ा तबका अब भी स्त्रियों के साथ काम करने को लेकर बहुत सहज नहीं है। शायद इसीलिए कामकाजी महिलाएं अपने सहकर्मियों के अस्वाभाविक और कुंठित व्यवहार की शिकायतें अक्सर करती रहती हैं। ऐसे ही लोग महिलाओं को दी जाने वाली सहूलियतों और उनके हित में बने नियमों पर भी सवाल उठाते हैं और उन्हें अमल में लाने में भी कोताही बरतते हैं। दिल्ली के कॉल सेंटर में स्पाई कैम रखने वाले कर्मचारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसके तहत जुर्माने या अधिकतम एक साल तक की साधारण कैद या फिर दोनों का ही प्रावधान है। उसे और सख्त धाराओं के तहत अधिकतम सजा देने की जरूरत है, क्योंकि उसके कृत्य ने न सिर्फ उस कॉल सेंटर की, बल्कि देश भर की कामकाजी महिलाओं में असुरक्षा भाव पैदा किया है। यह संदेश देना जरूरी है कि औरतों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का अंजाम बेहद बुरा होता है।
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