photo journalist from chhattisgarh. Worked for the Navabharat in Orissa as bureau chief. Presently with the Haribhoomi Super Central Desk.
Friday, April 23, 2010
गायत्री परिवार के पाखण्डी
धर्म, आध्यात्म के क्षेत्र में पाखण्ड से इस्पात नगरी भिलाई भी अछूता नहीं है। कहीं नित्यानंद, कहीं इच्छाधारी संत तो कहीं साक्षात करैत। एक ऐसा ही पाखण्डी ॐगायत्री परिवार में भी है। ट्रैवल्स के धंधे में फर्जी बिल बना-बना कर अकूत धन इकट्ठा करने वाले इस परिवार ने भिलाई के एजुकेशन माफिया से भी रिश्ता जोड़ लिया है। न केवल रिश्ता गांठा है बल्कि एक इंजीनियरिंग कालेज भी खोल लिया है। कम ही लोगों को पता होगा कि इस व्यक्ति के पास नेहरू नगर में दर्जनों मकान हैं। ये सभी मकान किराये पर चढ़े हुए हैं जिनमें से 70 फीसदी बिना किसी एग्रीमेन्ट के हैं। इन किराएदारों को वे रसीद तक नहीं देते। अपने किराएदारों की तरक्की से जलने वाले इस परिवार की नई पीढ़ी करेला और नीम चढ़ा की कहावत को चरितार्थ कर रही है। पैसा उनके सिर चढ़कर ऐसा बोल रहा है कि वे आदमी को आदमी नहीं समझते। पता नहीं ॐमाता गायत्री इनकी पूजा भी कैसे स्वीकार करती होगी। हाल ही में इनके एक किराएदार ने अपना मकान बनवा लिया। इस किराएदार से उनका कारोबारी रिश्ता भी था। लेनदेन में एक पैसा भी बकाया नहीं था। बाप के कहने पर किराएदार को आनन फानन में कब्जा खाली करना पड़ा। कुछ दिन बाद बाप-बेटा साथ-साथ मकान पर पहुंचे और अपने पूर्व किराएदार की खूब बेइज्जती की। उसकी गाड़ी की चाभी छीन ली। चक्के की हवा निकाल दी। पूर्व किराएदार को भरी धूप में पैदल हिसाब-किताब लाने के लिए भेज दिया। जबरदस्ती एक चेक लिखवाया। हालांकि मध्यस्थता में शाम को जब हिसाब-किताब हुआ तो उसे चेक लौटाना पड़ा। ॐगायत्री परिवार के इस झण्डाबरदार ने इतनी इंसानियत भी न दिखाई कि सॉरी ही बोल देता। ऐसे पाखण्डियों की वजह से ही न केवल धर्म कमजोर हुआ है बल्कि हिन्दुत्व शर्मसार हुआ है। सरकारी अफसरों को लाखों रुपये रिश्वत देने की ताकत रखने वाला यह परिवार किसी सदुद्देश्य को लेकर शिक्षा के क्षेत्र में आया हो, यह मुमकिन नहीं दिखता किन्तु यही कलियुग की नियति है। अब धर्म का उपदेश देने वालों के बेडरूम से ही बारबालाएं, सिने तारिकाएं निकलती हैं। पढ़ने में कमजोर छात्राएं अपने माँ-बाप की इच्छा से बाबाओं के पास पहुंचती हैं और उनका खिलौना बन जाती हैं। कोई जिस्मफरोशी का नेटवर्क चलाकर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है तो कोई शिक्षा की दुकान सजा लेता है। राष्ट्रपिता से छापे का फोटू बनकर रह गए गांधी ऐसे लोगों के घरों में बोरों में ठुंसे पड़े रहते हैं। अब यही इंडिया के भाग्यविधाता हैं।
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Namaskar Deepak Sir,
ReplyDeleteMain pehle baar aapke blog par visit kar raha hu..kyonki isse pehle to aapke baare me jaanta bhi nahi tha.
Maine google reader par chittajagat ke posts subscribe kiya hua hai..jyada waqt nahi milta bahut saare blog padhne ka isliye ye mujhe behtar tarika laga.
Waha aapka lekh padha aur bahut accha laga.
Aur accha laga to aapke blog par visit kiya. Aur news ke baare me mujhe bilkul bi jaankari nahi thi. I'm an engineering student isliye jyada samay to milta nahi insab ke baare me padhne ka.
ReplyDeleteLekin main hindi blogs ka bahut fan hu aur jab internet use karta hu to blogs jaroor padhta hu.
धन्यवाद धीरज जी, आपने हमारा ब्लाग पढ़ा। यदि आपको ऐसा महसूस होता है कि खबरों पर हमारी टिप्पणी सही दिशा में किया जा रहा एक प्रयास है तथा इससे लोगों को विभिन्न ऐसी घटनाओं पर अपनी भड़ास निकालने का अवसर मिलेगा तो कृपया हमें अवगत कराएं। यदि कुछ सुझाव हों तो उनका भी स्वागत है।
ReplyDeleteप्रिय दीपक दास, आपका यह लेख पढ़ा.लगता है किसी घटना से आपको मानसिक पीड़ा पहुंची है तथा अपनी वेदना व्यक्त करना चाहते हैं. यहाँ पर आप जो भी लिखना चाहते हैं मुझे लगता है यह समाधान नहीं है. हम उस कार्य में अपना श्रम करें जो परिणामदायी हो. इसके लिए उचित तौर पर क़ानूनी सहायता की अपेक्षा करनी चाहिए. एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि लेख से यही बात सामने आ रही है कि यह व्यक्तिगत कारणों से विवाद का जन्म हुआ है किन्तु आपने अपने संबोधन में गायत्री परिवार को रेखांकित कर संबोधन किया है जो किसी भी दशा में शोभनीय नहीं है.. किसी व्यक्ति का नाम यहाँ उल्लेख कर सकते हैं. मुझे आशा है आप समझदारी से काम लेंगे..
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