Tuesday, April 13, 2010

मरीज से छेड़छाड़

छेड़छाड़ भी बड़ा अजीब सा शब्द है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने कोई किस्सा छेड़ दिया हो और फिर बिखेर दिया हो। पर अमूमन ऐसा होता नहीं है। कोई छेड़ता है तो कोई और उसे छुड़ाता है। वैसे कानून की भाषा में छेड़छाड़ का बड़ा व्यापक अर्थ है। कानून ने महिलाओं को घूरना भी छेड़खानी की परिभाषा में शामिल किया है। अब घूरना शब्द की तो कोई परिभाषा है नहीं। अब कोई किसी को निहार रहा है, आंखों ही आंखों में तारीफ कर रहा है यो बुरी नजर से देख रहा है, इसका फैसला या तो कानून को करना है या फिर उसको जिसको किसी से दुश्मनी निकालनी हो। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र में हुई घटना भी कुछ ऐसी ही है। जिस चिकित्सक पर छेड़खानी का आरोप लगा है, उसके मित्र बताते हैं कि उसके पास अपनी बीवी को छेड़ने का भी वक्त नहीं। वह इतना बिजी डाक्टर है कि लोग फोन पर भी उससे खुजली और खाज की दवा पूछते हैं। वैसे वे हैं भी चर्मरोग विशेषज्ञ। लोग उनके पास खाज-खुजली का इलाज करवाने भी जाते हैं। अब किसे क्या तकलीफ है, यह कोई और कैसे बता सकता है। चिकित्सक और मरीज के बीच की बातें वैसे भी गोपनीय होती हैं। बहरहाल इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। यहां तो मरीज चिकित्सक तक पहुंची ही नहीं थी। उसे शिकायत तो इसी बात की थी कि एक बड़ी नेता को साथ लेकर जाने के बाद भी बीएसपी के एक डाक्टर ने उसे घास नहीं डाली थी। उसे लाइन से आने के लिए कहा था। यही इस अस्पताल का कायदा है। उसे यह पसंद नहीं था। उसने डाक्टर की खबर लेने की ठानी। लिहाजा हल्ला कर दिया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक ने तत्काल एक समिति का गठन कर दिया है। समिति मामले की जांच करेगी। समिति यह पता लगाएगी कि आइंदा ऐसे मरीजों को चिकित्सक देखें या पूछकर ही दवा दे दें। बातों पर भी छेड़खानी का आरोप लग सकता है, बल्कि लगता रहा है। लोग कथित आपत्तिजनक शब्दों के कारण जेल जाते रहे हैं। तो क्या अब डाक्टर मरीज को फीडबैक फार्म देकर उसे भरने के लिए कहेगा? कहना मुश्किल है। दुनिया तेजी से बदल रही है। कथित कम्प्यूटर फार्म का जमाना है जिसमें सवाल दिये होते हैं और उनके आगे खाने बने होते हैं। सवाल होंगे खुजली कब हुई। कितनी कितनी देर से हुई, खुजाने पर कैसा लगा, क्या खुजाने पर चमड़े का रंग बदल जाता है, क्या वहां से रस निकलने लगता है, आदि आदि। मरीज इस फार्मेट को भरकर दे देगा। डाक्टर आंकड़ों को कम्प्यूटर में डाल देगा और फिर जो भी दवा तजवीज की जाएगी उसे एक पर्ची पर लिखेगा, फिर उसकी इंट्री अपने रजिस्टर में करेगा और मरीज वाह! वाह! करता हुआ घर चला जाएगा। यही हाईटेक जमाने की डिमांड है, फिर चाहे इसका नतीजा कुछ भी क्यों न निकले...

1 comment:

  1. संगीता जी। हालांकि मेरी पूरी शिक्षा दीक्षा अंग्रेजी में हुई और मेरी मातृभाषा बंगला है, तथापि हिन्दी मुझे सर्वाधिक करीब लगती है। मेरी हार्दिक इच्छा है कि लोग समाज की विसंगतियों पर बेबाकी से लिखकर इन भावनाओं को उन तक पहुंचाएं जो स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए कुछ कर सकते हैं। आपको मेरा प्रयास अच्छा लगा। धन्यवाद।

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